(घटिया लोगों के बारे में एक घटिया कविता)
मत करो अपने अधिकारों के लिए फाइट।
सारी समस्याओं की जड़ हैं मुल्ले
हम उनको कर रहे हैं टाइट।
लव जेहाद लैंड जेहाद मज़ार जेहाद
चलाने वाले घुसपैठियों के घरों पर
चला रहे हैं बुलडोज़र
आपकी ज़िन्दगी में फैला रहे हैं लाइट।
भूल जाओ बेरोज़गारी, मँहगाई और
नागरिक स्वतंत्रता को
देखो हिन्दू-धर्म-ध्वजा की लगातार बढ़ती हाइट।
खोदेंगे हम मस्जिदों को
मंदिरों के निशान ढूँढ़ने के लिए
छोड़ेंगे नहीं कोई साइट।
भारत को फिर से बनायेंगे सोने की चिड़िया और
इतिहास में सैकड़ों साल पीछे जाकर
गजनवी, गोरी और बाबर को देंगे
ज़बरदस्त फाइट।
महाबली डोलाण्ड है हमारा जिगरी दोस्त
जूते भी मारेगा भिगोकर तो बड़े प्यार से
फिर एफ-35 उड़ायेंगे हम जैसे काइट।
और ये देखो, जल्दी ही राजधानी में उतरने वाली है
पुतिन की भी फ्लाइट।
इन्तज़ार करो फिर से नयी ख़ुशियों का
टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाली है
नॉनबॉयोलॉजिकल हिन्दू-हृदय-सम्राट की
एक नयी बाइट।
और तुम्हें क्या चाहिए भूखे नंगे नामुरादो!
देखो इक्कीसवीं सदी में विश्वगुरू भारत की
बढ़ती हुई माइट।
भक्त बनो, भीड़ बनो, रेवड़ बनो भेड़ों के
यह सोचना तुम्हारा काम नहीं कि
क्या है रांग और क्या है राइट।
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(19 Feb 2025)
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