Saturday, January 12, 2019



राजनीतिक या साहित्यिक लेखन करने वालों में यदि सुस्‍पष्‍ट सैद्धान्तिक अवधारणाओं की कमी होती है तो वे प्राय: ऐसे शब्‍द चातुर्य और खोखले शब्‍दाडम्‍बर का सहारा लेते हैं, जिनसे पण्डिताऊपन और रहस्‍यवाद की बू आती है। ऐसे लोगों के बारे में हेगेल गोयठे की सुप्रसिद्ध कृति 'फाउस्‍ट' से मेफिस्‍टोफिलिस की विषबुझी उक्ति का इस्‍तेमाल करते हैं: '' और यदि रह जाती है अवधारणाओं में कोई कमी, ले सकता है शब्‍द उनका स्‍थान ।''
  

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Theory is grey my freind and green is the etarnal tree of life.

सिद्धान्‍त होता है धूसर भूरा मेरे दोस्‍त 
और हरा होता है जीवन का चिरंतन वृृक्ष।

एक और अनुवाद:
जाने-माने हर नज़रिया बेरंग है बस सुरमई,
हाँँ मगर सरसबज़ है ज़र्रीं निहाले ज़ि‍न्‍दगी।

-- गोयठे ('फाउस्‍ट') 


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चेरी और स्ट्राबेरी का स्वाद कैसा होता है, यह बच्चों और चिड़ि‍यों से पूछना चाहिए।
-- गोयठे



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सभी बच्चे कलाकार होते हैं। समस्या यह होती है कि बड़ा होने के बाद भी वे कलाकार कैसे बने रहें।
-- पिकासो



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सच शायद ही कभी शुद्ध होता है और सीधा-सरल कभी नहीं होता I

-- ऑस्कर वाइल्ड



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औरतों से सावधान रहना, जब वे अपने आसपास चल रही सारी चीज़ों से घृणा करने लगें I तब वे पुरानी दुनिया के ख़िलाफ़ उठ खड़ी होंगी I उस दिन से नयी दुनिया की शुरुआत हो जायेगी।

-- लुइस मिशेल (29 मई 1830 - 9 जनवरी 1905)

स्त्री कम्यूनार्ड, पेरिस कम्यून, 1871





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