-- नाज़िम हिकमत .
इस तरह से
मैं खड़ा हूँ बढ़ती रोशनी में
मेरे हाथ भूखे, दुनिया सुंदर
मेरी आँखें समेट नहीं पातीं पर्याप्त पेड़ों को -
वे इतने उम्मीद भरे हैं, इतने हरे।
एक धूप भरी राह गुज़रती है शहतूतों से होकर ,
मैं जेल चिकित्सालय की खिड़की पर हूँ।
सुंघाई नहीं दे रही मुझे दवाओं की गंध -
कहीं पास में ही खिल रहे होंगे कार्नेशन्स।
यह इस तरह है :
गिरफ़्तार हो जाना अलग बात है,
ख़ास बात है आत्म-समर्पण न करना !
(अंग्रेजी से अनुवाद-वीरेन डंगवाल)

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