प्यार-व्यार, ज़िन्दगी-विन्दगी वगैरा-वगैरा के बारे में कुछ गपशप टाइप कविताएँ ...
1.कुछ चीज़ें, जैसे कि...
कुछ धुनें
सिर्फ़ पार्श्व संगीत के लिए ही
बेहतर होती हैं I
कुछ अपेक्षाएँ
और कुछ प्रतीक्षाएँ
निष्फल ही
अविस्मरणीय होती हैं I
कुछ दुख
सार्वजनिक होकर
काव्यात्मकता खो देते हैं I
कुछ स्मृतियाँ
चुपचाप कविता में
सुरक्षित रख दी जाती हैं I
कुछ कौल-क़रार ख़ुद से
किये जाते हैं I
ज़मीर की अदालत में दायर
मुकदमे में
किसी गवाही की
ज़रूरत नहीं होती I
**
2.एक बौड़म कथा की कविता
एक बार की बात है!
ऐसा हुआ कि
एक कहानी से
मुझे निकाल दिया गया
अनावश्यक चरित्र की तरह
और फिर से लिख दिया गया उसे I
उसके सुगठित फ़ाइनल ड्राफ़्ट में
कहीं कोई निशान तक नहीं था
कभी किसी के होने का
या चले जाने का I
कहीं कोई झोल नहीं था I
उसके सौन्दर्य में
इतना था निर्मम ठोसपन
पाठकों और आलोचकों की
दृष्टि से ओझल I
मैंने तो कविता से
बस एक स्मृति को हटाया था एक बार
एक अवांछित बिम्ब की तरह I
पर अभी भी
वहाँ एक हल्का सा साँवला धब्बा है
बहते हुए पानी पर काँपता हुआ
किसी हिलती हुई पत्ती की छाया सा!
और अभी कल ही,
या शायद परसों,
एक दोस्त कह रही थी
कि चंद दिनों का सच्चा प्यार भी
नश्वरता को
गरिमा और आभा से भर देता है
और मैं सोच रही थी
कि इन सारे मामलों में
बौड़म होना भी
कितना विरल गुण होता है
और भूलना
कितना अच्छी और
सुकूनतलब आदत !
**
3. शीर्षकहीनता
बहुत भव्य शीर्षक सूझने के बाद
कविता दो लाइन भी
आगे न बढ़ सके
तो बेहतर है कि
सादगी और निश्छलता से भरी
कुछ शीर्षकहीन पंक्तियाँ
लिखी जायें
या फिर कुछ यूँ ही
गोयाकि-चुनांचे टाइप
लंतरानी हाँकी जाये I
आखिर कोई यूँ ही
दिल खोलकर
थोड़े ही न रख देगा
लोगों की फ़रमाइश पर
जैसे कटपीस का नमूना दिखा रहा हो !
**
4. दुहराव के विरुद्ध
मंच पर बार-बार खेले जाने वाले
किसी सफल नाटक का
कोई अहम किरदार होने से
बेहतर है
किसी ऐसे नाटक में
कोई छोटी-मोटी भूमिका निभाना
जिसका मंचन सिर्फ़ एक बार होना हो
और जिसकी कथा, संवाद
और भूमिकाएँ
पहले से तय न हों!
जीवन में
या प्यार में
या कला में
दुहराव,
और सबकुछ पहले से तय होना
असुन्दर होता है I
हर नये साल में
जब पतझड़ आता है
या कि वसंत,
तो वह एकदम वैसा ही नहीं होता
जैसा बीते हुए साल में
हमने जिया था I
मौसम अगर अपने को दुहराने लगें
तब भी हम उन्हें
ऐसा नहीं करने देंगे I
उनके वजूद के साथ
कुछ कविताएँ,
कुछ सपने,
प्यार करने की कुछ निश्छल सी कोशिशें
और कुछ पागलपन जोड़ दिया करेंगे!
**
(22 Sept 2022)

No comments:
Post a Comment