मोदी -- "अबे ये हथेली से तेल कैसे निकालते हैं और कितनी हथेलियों से निकालते होंगे कि पाम ऑयल पूरी दुनिया में बिकता है । मैं ख़ुद खानदानी घाँची तेली होकर भी नहीं जानता । अब चल तू ही बता !"
शाह -- " साहेब, उसके लिए हज़ारों हथेलियों पर पहले तेल का ख़ास पेड़ उगाना होता है । पाम ट्री का नाम तो सुना ही होगा आपने ! फिर उन पेड़ों की जड़ों में सारा तेल इकट्ठा हो जाता है । तब पेड़ों को हटाकर हथेलियों को निचोड़ लेते हैं ।"
मोदी --(ठठाकर हँसते हुए) "अरे हमारे अंबानी जी अदानी जी तो साबुत आदमी निचोड़ देते हैं, तो फिर ये हथेली निचोड़ना कौन बड़ी चीज़ है !
(12 Oct 2020)
(कविता कृष्णपल्लवी,फेसबुक पर एक पोस्ट)
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मेरे एक भलेमानस शुभचिंतक कहते ही हैं कि मैं 'अंट-शंट' लिखकर अपनी प्रतिभा का सत्यानाश कर रही हूँ ! वैसे तो बुर्जुआ संस्कृति के इस चरम पतनशील दौर में सारी प्रतिभा का इस्तेमाल करके या तो सत्ता का कुत्ता बन जाओ, या फिर 'सद्गृहस्थ' सुप्रतिष्ठित बौद्धिक बनाकर सत्ता के दिए सुविधा-संपन्न भवन के सुसज्जित, कलात्मक अध्ययन-कक्ष में साधना-रत जीवन काट दो ! और प्रतिभा का तो बढ़िया अँचार या मुरब्बा भी नहीं बनता, मैंने गूगल करके देख लिया I और महान और महानोन्मुख कवियों के "भद्रलोक" से मैं तो वैसे भी तिरस्कृत-बहिष्कृत-लांछित हूँ, उनके यज्ञों के हवन-कुंडों में हड्डी-मांस आदि जो डालती रहती हूँ ! इसलिए कविता के नंदन-कानन में कुछ उत्पात करने से अपुन का क्या जाता है !
तो चलिए, फिर कुछ अंट-शंट वाली तुकबंदी की जाए :
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यह एक कनफटा गुण्डा
है मुछमुण्डा सिरमुण्डा
भेजा तो इसका देखो
जैसे हो मल का कुंडा
यह खूनी दंगाई है
यह बर्बर अत्याचारी
रेपिस्टों का संरक्षक
है लाशों का व्यापारी
रंगा-बिल्ला-बजरंगी
यह उनका पक्का संगी
सत्ता से चिपका बैठा
यह पैशाचिक हुड़दंगी
यह विकट मनोरोगी है
कहने को बस जोगी है
फासिस्टों का सेनापति
वैभव-विलास भोगी है
पर बहुत समय तक इसका
यह खेला नहीं चलेगा
सडकों पर उमड़ी जनता
का रेला नहीं रुकेगा !
(8 Oct 2020)
(कविता कृष्णपल्लवी,फेसबुक पर एक पोस्ट)
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हाँ, यह हुई कोई बात ! मैं #अर्णबपर_थुकता_है_भारत_challenge स्वीकार करते हुए उसके ऊपर एक कविता थूकती हूँ ! बस एक शिकायत है कि जिसने यह मुहिम चलाई है, उसने 'थूकता' को 'थुकता' लिख दिया है, यानी थ में ऊ की जगह उ की मात्रा लगा दी है, जिससे अर्नब पर पड़ने वाली थूक की पिचकारी थोड़ी छोटी हो गई है जो कि कम से कम अर्नब के मामले में तो कत्तई नहीं होनी चाहिए ! वैसे भी, गाली देते समय भी, यानी अभिधा की जगह लक्षणा और व्यंजना में थूकते समय भी, भाषा की शुद्धता का पूरा ख़याल रखा जाना चाहिए ! आप इस 'थूक कविता' को जगह-जगह चिपका सकते हैं, वर्चुअल वाल पर और रीयल वाल पर भी और किसी भक्त के मुँह पर भी थूक लगाकर चिपका सकते हैं !
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थूको-थूको, इसपर थूको, जल्दी थूको,
मन भर थूको, फिर-फिर थूको, दिन भर थूको,
रात में थूको, सुबह को थूको, शाम को थूको ,
अर्नब पर थूको सब लोगो, जमकर थूको !
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अर्नब है मोदी का कुत्ता, इसपर थूको,
अर्नब अमित शाह का जुत्ता, इसपर थूको
संघी कुत्तों का यह मुत्ता, इसपर थूको
गोयबल्स का नाजायज़ पूता, इसपर थूको !
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अर्नब पाखाने का कुंडा, इसपर थूको
छंटा हुआ फासिस्टी गुण्डा, इसपर थूको
टीवी पर भौं-भौं करता है, इसपर थूको
गाँजा पी चौं-चौं करता है, इसपर थूको !
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अर्नब सूअर का बच्चा है, इसपर थूको
ब्लैकमेलरों का चच्चा है, इसपर थूको
यह दल्ला है, यह भंड़वा है, इसपर थूको
बिना पूँछ का गदहा है, सब इसपर थूको !
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चलो-चलो, सब जल्दी थूको, बच्चो थूको, बूढो थूको
सब माताओ-बहनो थूको, छात्रो और जवानो थूको,
इस ग़लीज़ पर जितना मन हो उतना थूको
पूरा भारत, इसपर थूको !
(8 Oct 2020)
(कविता कृष्णपल्लवी,फेसबुक पर एक पोस्ट)
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आने वाले और अधिक बर्बरता और अँधेरे भरे समय में मैं कई मैराथनों के लिए हिन्दी के सुधी विद्वानों-विदुषियों और कलावन्तों और साहित्य-मर्मज्ञों को आमंत्रित करूँगी ताकि उनका तनाव थोड़ा ढीला हो सके, इस मनहूस फासिस्ट समय में जी थोड़ा हल्का हो सके और कोरोना-अलगाव की बोरियत थोड़ा कम हो सके (वैसे 'सोशल डिस्टेंसिंग' का पालन तो बड़े और संभ्रांत-कुलीन वाम-जनवादी कवि-लेखकगण भी हमेशा से ही करते रहे हैं !) !
जैसे, 'अपनी बीन बजाओ' मैराथन, ठलुआ-विमर्श मैराथन, कला कोविद टांग-खींच मैराथन, साहित्यिक रति-रहस्य वर्णन मैराथन, उखाड़-पछाड़ मैराथन, खण्ड-खण्ड-पाखण्ड मैराथन, मण्डूक कूप-तरण मैराथन, रसरंजनी क्रीड़ा-कल्लोल मैराथन, 'पलीता लगाओ' मैराथन, नवनीत-लेपन मैराथन, 'आलोचक-सम्पादक पटाओ' मैराथन, पद-पीठ-पुरस्कार झपट-लपक मैराथन, शुतुर्मुर्गासन मैराथन, गिरगिटासन मैराथन ... ... आदि-आदि !
यानी कि,
'शुरू करो अब मैराथन लेकर हरि का नाम
समय बिताने के लिए करना है कुछ काम
करना है कुछ काम जगत में नाम कमाओ
कर आपस में पीठ-ठुकाई मन बहलाओ !'
(कविता कृष्णपल्लवी,फेसबुक पर एक पोस्ट)
(6 Oct 2020)

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