Wednesday, October 07, 2020

शुभचिन्तक भलेमानस ने कहा...

 

एक शुभचिन्तक भलेमानस ने  कहा,"क्यों अण्ट-शण्ट लिखकर अपनी प्रतिभा का सत्यानाश करती रहती हो ?"  

मैंने कहा,

"मैं हूँ जनम की सत्यानाशी

प्रतिभा से होती है खुजली

दिल उनके काले हैं जो 

ओढ़े रहते हैं चादर उजली ।"

तब उन्होंने कहा,"भाड़ में जाओ !"

मैंने कहा,"अजी, हम आम लोग तो भाड़ ही में रहते हैं । ज़रा आँच की ताप बढ़ने दीजिए, फिर ऐसे फूटेंगे कि हाँड़ी भी फूटेगी और हमें भाड़ में झोंकने वाले भड़भूजे की आँख भी ! हम कोई अकेला चना थोड़े ही हैं !"

(7 Oct 2020)

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