Sunday, September 06, 2020


कल की कुटम्मस के बाद आज भक्त अपने पिताश्री से बोला,"पिताजी, कल आपने नाहक इतना कूट दिया ! देखिए, रेल मंत्री ने रेलवे में वैकेंसी निकालने की घोषणा कर दी !"

पिताजी फिर भड़ककर पजामे से बाहर हो गये,"अबे भूतनी के ! तेरे सिर से अभी मोदड़े का भूत नहीं उतरा ? दो साल पहले भी रेलवे में नब्बे हज़ार वैकेंसी की घोषणा की थी । क्या हुआ उनका ? अरे भाजपाइयों की घोषणा और घोड़े की पाद एक बरोबर ! कल जब लगा कि लोग सड़कों पर इनकी बजायेंगे तो फटाफट एक घोषणा की उलटी कर दी ! तू तो निरा अंधा कुत्ता है रे ! ठहर, मैं अभी फिर तेरा भूत उतारता हूँ !"

भक्त इस बार पहले से ही चौकन्ना था । फ़ौरन बरामदे से कूद कर सड़क पर आ गया और कुलांचें मारता हुआ भाग चला ।

(6सितम्‍बर, 2020)


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