Tuesday, September 01, 2020

 

सभी बुर्जुआ नेता पूंजीपतियों के कुत्ते हैं -- देसी कुत्ते ! 

बुर्जुआ न्यायपालिका तवायफों का कोठा है जहां इंसाफ़ की पतुरिया नाचती है और काले कोट वाले दल्ले ग्राहक फांसते घूमते हैं । 

संसद में सूअर लोटते हैं ।

मंत्रिमंडल की बैठकों में सधाये हुए बंदर-भालू-रीछ नाचते हैं ।

 सत्ता के कृपाकांक्षी सभी बुद्धिजीवी तिलचट्टे, झींगुर, केंचुए और कनखजूरे हैं ।

सभी बुर्जुआ मीडिया वाले श्मशान के गिद्ध, कौव्वे और कुत्ते हैं ।

.

अब बताइए, मैंने कितनों की कितने रुपए की मानहानि की ! जोड़कर बताइए, फ़ौरन हिसाब चुकता कर दूंगी । रेट प्रशांत भूषण वाला ही लगाइयेगा ! अलग-अलग रेट नहीं लगना चाहिए ! क़ानून को सबको एक निगाह से देखना चाहिए ।

No comments:

Post a comment