Monday, September 07, 2020


एक शुभचिंतक भलेमानस हैं । बहुत परेशान रहते हैं कि हम और अधिक मेहनत और ईमानदारी से काम करके समाज को और अधिक जल्दी से क्यों नहीं बदल डालते ! 

आज फिर टकरा गये । पूछा,"आपलोग इतने दिनों से जो काम कर रहे हैं, उसका क्या नतीजा निकला है ?"

मैंने कहा,"पहले आप बताइए कि आप इतने दिनों से क्या करते रहे हैं और उसका क्या नतीजा निकला है ?"

नाराज़ हो गये और मुँह बिचका कर आगे बढ़ गये ।

(7सितम्‍बर, 2020)

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एक भाई साहब हैं । मैं उन्हें पहले ही इशारा कर देती हूँ कि अब मैं कोई हँसने वाली बात करने वाली हूँ । फिर तो उस बात पर वह छतफाड़ू ठहाका लगाते हैं और पेट पकड़कर देर तक हँसते रहते हैं ।

(7सितम्‍बर, 2020)


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