Thursday, September 19, 2019


फासिज़्म "सड़ता हुआ पूँजीवाद" है । इस सड़े हुए पूँजीवाद के सभी वैचारिक-राजनीतिक प्रतिनिधि बेहद सड़े हुए दिमाग़ के लोग होते हैं । वे मनोरोगी होते हैं, उनका यौन जीवन वीभत्स और असामान्य होता है । इसपर अतीत में काफी कुछ लिखा जा चुका है । इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि संस्कृति और धर्म की बात-बात में दुहाई देते रहने वाले भगवाधारी और हाफपैंटिए इतने बड़े पैमाने पर दुराचारी, व्यभिचारी, बलात्कारी, लम्पट, पोर्नसेवी, विलासी और रुग्णमानस निकल रहे हैं । फासिस्ट ऐसे ही होते हैं । लेकिन जब हम सोशल मीडिया में फासिस्टों की राजनीति, विचारधारा और संस्कृति की जगह उनके रुग्ण यौनाचरण पर लगातार विस्तृत चर्चा करते हैं तो स्वयं लक्ष्यच्युत हो जाते हैं । बेशक इनके दुराचारों को उजागर किया जाना चाहिए, लेकिन यह बताना ज़रूरी है कि यही इनकी संस्कृति है, और मूल विषय हमेशा इनकी राजनीति के जनद्रोही चरित्र और दुष्परिणामों को नंगा करना होना चाहिए । फासिस्ट विचारधारा के मानवद्रोही चरित्र को निरावृत्त करते हुए हमें अपना स्टैण्डर्ड कभी नीचा नहीं करना चाहिए ।

(15सितम्बर, 2019)

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