जब भी तुम हमें गौरी लंकेश, दाभोलकर, पानसारे, कलबुर्गी के रास्ते भेज देने की धमकी देते हो,
जब भी तुम कहते हो कि हमारा इस देश में रहना दूभर कर दोगे,
जब भी तुम हमें ई.वी.एम. से निकले अपने प्रचंड बहुमत के जिन्न को दिखाते हो,
या इशारों-इशारों में अपनी जेबों में पड़ी न्यायपालिका की या पुलिसिया डंडों और फ़ौजी बूटों की, या जेलों, यंत्रणा-गृहों, क़त्लखानों की धौंस देते हो,
या मोर्निंग वाक की दुर्घटनाओं के या मुठभेड़ों के या सड़कों पर मंडराती अपनी गुंडा-वाहिनियों के और सोशल मीडिया पर खूंटा गाड़े ट्रोल्स के हवाले देकर धमकाते हो,
तो हमारी जिद को और मज़बूत बना जाते हो, हमारे संकल्पों को इस्पाती बना जाते हो !
पूरी पृथ्वी पर भी चाहे गूँजे तुम्हारी विजय-दुन्दुभी, चाहे तमाम प्रगतिशील भी भगवा ओढ़कर गाने लगें तुम्हारे लिए चारण-गान और मंगल- गीत,
हम तो फिर भी पूछते रहेंगे रफाएल घोटाले से जुड़े तमाम अनुत्तरित प्रश्न और तमाम-तमाम अरबों-खरबों के घोटालों के बारे में, बैंकों का पैसा लेकर भाग गए पूँजीपतियों के बारे में,
औने-पौने दामों पर बिकती सार्वजनिक संपत्तियों के बारे में, अम्बानी-अदानी की बेशुमार बढ़ती दौलत और लूट के बारे में,
लाखों की छंटनी और करोड़ों की बेरोज़गारी के बारे में, हर साल अपनी जगह-ज़मीन से दर-बदर होते लाखों गरीबों के बारे में,
मुज़फ्फ़रपुर के बारे में, उन्नाव के बारे में, सोनभद्र के बारे में, छत्तीसगढ़ के बारे में,
कश्मीर के बारे में, नागरिकता रजिस्टर के बारे में और तमाम-तमाम काले कानूनों के बारे में !
धर्मान्धता की आँधी के ख़िलाफ़, धार्मिक अल्पसंख्यकों को अलगाव और आतंक के साए तले जीने को मज़बूर करने वाले तुम्हारे सभी कुचक्रों के ख़िलाफ़,
विवेक, तर्कणा, जनवाद, मानववाद, सेकुलरिज्म के विरुद्ध तुम्हारी सारी मुहिमों के ख़िलाफ़ हम हमेशा खड़े रहेंगे तनकर चट्टान की तरह !
हम तुम्हारे सारे मंसूबों को, जबतक रहेंगे, डायनामाइट लगाते रहेंगे !
और अगर हम नहीं होंगे तो फिर बहुत सारे लोग तैयार हो चुके होंगे इस काम को अंजाम देने के लिए !
हम अभी और सुनायेंगे रामू की कहानियाँ, और बताएँगे नफरती चिंटूओं के बारे में और पूरे मुल्क का सौदा करने वाले प्रॉपर्टी डीलर दुग्गल साहब के बारे में !
हम यह सब करेंगे क्योंकि हम जानते हैं कि कोई भी अत्याचार-अनाचार का साम्राज्य अमर तो क्या दीर्घकालिक भी नहीं होता !
हम यह सब इसलिए भी करेंगे क्योंकि हम अपना नाम इतिहास की संदूकची में बंद उस काले रजिस्टर में दर्ज नहीं कराना चाहते जिसमें तमाम कायर किताबी कीड़ों, डोमाजी उस्ताद के साथ जुलूस में चलने वाले बुद्धिजीवियों,
बिलों में सटक गए झींगुरों तथा वजीफों और इनामों के लिए हत्यारों को राग दरबारी सुनाने वाले, गैंडे जैसी मोटी खाल वाले बेशर्म कवियों-लेखकों के नाम दर्ज रहते हैं !
(12अगस्त, 2019)

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