अपराधी जब न्याय की कुर्सी पर बैठते हैं
तो नागरिक का सामान्य जीवन जीना ही अपराध बन जाता है
और हर नागरिक को अभियुक्त बनकर कटघरे में खड़ा होना होता है I
लेकिन शुरुआत उनसे होती है जो अपराधी के न्याय की कुर्सी पर
बैठे होने पर ही सवाल उठाते हैं !
और चूँकि अभियुक्तों की संख्या बहुत अधिक होती है
इसलिए पूरे देश को ही जेलखाना बना दिया जाता है !
(12अगस्त, 2019)

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