"मेरे पिता एक गुलाम थे, और इस देश के निर्माण में मेरे लोगों ने भी जानें दी हैं, और मैं यहीं रहूँगा, और ठीक तुम्हारी तरह इसका हिस्सा बना रहूँगा I और कोई भी फासिस्ट ज़ेहनियत का इंसान मुझे यहाँ से बाहर नहीं कर सकता ! बात समझे कि नहीं ?"
-- सुप्रसिद्ध अश्वेत गायक और नागरिक अधिकारकर्मी पॉल रोबसन
(1956 में मैकार्थी काल में 'हाउस अनअमेरिकन अफेयर्स कमेटी' के सामने बयान)
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(भारत में जो हिन्दुत्ववादी फासिस्ट आयेदिन मुसलमानों को देशद्रोही घोषित करते रहते हैं और उनको तथा तमाम सेक्युलर-जनवादी लोगों को पाकिस्तान भेजते रहते हैं, उनके सामने तनकर खड़ा होना होगा और उनकी आँखों में आँखें डालकर इन्हीं शब्दों में उन्हें चुनौती देनी होगी ! यह समय रक्षात्मक मुद्रा अपनाने का नहीं, बल्कि निर्भीक और आक्रामक रुख अपनाने का है I)

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