Tuesday, August 06, 2019


"मेरे पिता एक गुलाम थे, और इस देश के निर्माण में मेरे लोगों ने भी जानें दी हैं, और मैं यहीं रहूँगा, और ठीक तुम्हारी तरह इसका हिस्सा बना रहूँगा I और कोई भी फासिस्ट ज़ेहनियत का इंसान मुझे यहाँ से बाहर नहीं कर सकता ! बात समझे कि नहीं ?"

-- सुप्रसिद्ध अश्वेत गायक और नागरिक अधिकारकर्मी पॉल रोबसन
(1956 में मैकार्थी काल में 'हाउस अनअमेरिकन अफेयर्स कमेटी' के सामने बयान)

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(भारत में जो हिन्दुत्ववादी फासिस्ट आयेदिन मुसलमानों को देशद्रोही घोषित करते रहते हैं और उनको तथा तमाम सेक्युलर-जनवादी लोगों को पाकिस्तान भेजते रहते हैं, उनके सामने तनकर खड़ा होना होगा और उनकी आँखों में आँखें डालकर इन्हीं शब्दों में उन्हें चुनौती देनी होगी ! यह समय रक्षात्मक मुद्रा अपनाने का नहीं, बल्कि निर्भीक और आक्रामक रुख अपनाने का है I)

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