सोहराबुद्दीन, कौसर बी, तुलसी प्रजापति फर्जी मुठभेड़ के सभी आरोपी बरी हो गए I सभी गवाह पलट गए ! कोई सबूत नहीं, क्योंकि शाह के कॉल रिकार्ड्स का, गुजरात सी.आई. डी.के इन्टर्नल नोट्स का और फ़ॉरेंसिक रिपोर्ट्स का तो कोई मतलब होता नहीं !
पर आश्चर्य क्या ? गुजरात से जुड़े अधिकांश मुक़द्दमों में तो यही हुआ ! और शेष में भी यही होगा ! उसके पहले हिरेन पांड्या के मर्डर के मामले में क्या हुआ ? याद कीजिये कि व्यापम मामले के कितने गवाह अबतक इत्तेफाक़न किसी न किसी दुर्घटना में मर चुके हैं ? लोया की मौत सामान्य बतायी जा चुकी है न्यायपालिका द्वारा ! याद कीजिये कि क्या अभीतक मॉब-लिंचिंग के किसी भी अभियुक्त को या किसी भी हिन्दुत्ववादी आतंकवादी या किसी भी दंगाई को सज़ा हुई है ? और हाँ, योगी के ऊपर चलने वाले सभी मुक़दमे उठाये जा चुके हैं ! राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट से मोदी सरकार को क्लीन चिट मिल चुकी है !
.
पर कोई बात नहीं ! न्यायपालिका में अपना भरोसा बनाए रखिये और भारत के महान संविधान और लोकतंत्र की और गौरवशाली अतीत की दुहाई देते रहिये ! रोज रात में कायम चूर्ण खाकर सोइए, सुबह उठकर नीम्बू-पानी पीजिये और अनुलोम-विलोम और हास्य योग कीजिये ! राष्ट्रगान कान में पड़ जाए तो संडास में हगते समय भी फट उठकर सावधान की मुद्रा में खड़े हो जाइए और हमेशा एक-एक घंटे के अंतर पर 'भारत माता की जय' बोलते रहिये !
.
क्या अभी भी नहीं बुझा रहा है कि इक्कीसवीं सदी में भारत की यह नयी फासिस्ट खूनी प्रेतनी अपना सारा खूनी खेल बुर्जुआ जनवाद की चमकीली चुनरिया ओढ़कर नाचते हुए खेल रही है ! आपो गजबे घामड़-उजबक हैं महराज ! या तो जियादा किताब पढ़ने से आपका माथा घूम गया है, या फिर बहुत सुबिधा-आराम का जिनगी जीने से आपका कलेजा सिकुड़कर कबूतर के माफिक हो गया है, या फिर, दुन्नहूँ बात होइ सकत हैं I
(22दिसम्बर, 2018)

No comments:
Post a Comment