भाई ! मेरी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है कि बुड्ढा सिंधी दंगाई गुजराती हत्यारे के सामने किसतरह हाथ जोड़कर खड़ा है याचक की तरह ! महत्वपूर्ण यह भी नहीं है कि नागपुर में बैठे फासिस्टों के महामंडलेश्वर हत्यारों के गुजराती सरगना और उसके तड़ीपार दोस्त के ख़िलाफ़ यू.पी. के कनफटे गुंडे को आगे करना चाहते हैं या महाराष्ट्र के उस मोटी गाँठ और मोटे पेट वाले बदमाश को ! अहमियत इस बात की भी बहुत अधिक नहीं है कि मुम्बई के गुंडा गिरोह का नया डॉन इन दिनों गुजरात के हत्यारे से नाराज़ है ! इन बातों को अधिक तूल देने से फासिस्टों के ख़िलाफ़ फैसलाकुन लड़ाई के मंसूबे ढीले होते हैं ! बेशक़ फासिस्ट गिरोहों के भीतर भी कई क़िस्म के अंदरूनी अंतर्विरोध होते हैं ! फासिस्ट जंगली कुत्तों की तरह होते हैं जो अपने ही झुण्ड के घायल या कमजोर साथी को खा जाते हैं !
असली बात पर अपना ध्यान केन्द्रित करना होगा ! असली मुद्दा यह है कि फासिस्टों के ख़िलाफ़ तृणमूल स्तर से एक जुझारू जनसंघर्ष कैसे संगठित किया जाये !
(25दिसम्बर, 2018)

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