देर रात के राग
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Saturday, November 03, 2018
जो समझते हैं कि उनकी कृपादृष्टि न पड़े तो पौधे और फूल तो क्या बाग़ के बाग़ सूख जाते हैं, साहित्य के उन महामहिमों की ख़िदमत में ग़ालिब के हवाले से अर्ज़ किया है :
न सताइश की तमन्ना न सिले की परवा
गर नहीं हैं मिरे अशआर में मअ'नी न सही
-- मिर्ज़ा ग़ालिब
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