Thursday, November 01, 2018


दुग्गल साहब एंड कंपनी बेहद क्रिएटिव है ! बन्दों ने यथार्थ को फिल्मों के सस्पेंस और अतिनाटकीयता भरे अतियथार्थ में तब्दील कर दिया है ! देश की राजनीति में जो खेल चल रहा है, उसपर कोस्ता गावरास एक अच्छी फिल्म बना सकते हैं, एक हालीवुड स्टाइल की पोलिटिकल क्राइम थ्रिलर भी बन सकती है, या फिर मार्खेज की जादुई यथार्थवादी शैली में एक ज़बरदस्त उपन्यास लिखा जा सकता है I
भारतीय राजनीति का आपराधिक यथार्थ ऐसा है कि इसे पारंपरिक यथार्थवादी आख्यानात्मक शैली में नहीं बाँधा जा सकता I इसकी भयावहता और पतन को जादुई यथार्थवाद या मुक्तिबोधीय फंतासी की शैली में ही प्रभावी ढंग से दर्शाया जा सकता है !

(25अक्‍टूबर,2018)

No comments:

Post a Comment