देर रात के राग
Pages
मुखपृष्ठ
डायरी के नोट्स : जो सोचती हूं उनमें से कुछ ही कहने की हिम्मत है और क्षमता भी
कला-दीर्घा
कन्सर्ट
मेरी कविताई: जीवन की धुनाई, विचारों की कताई, सपनों की बुनाई
मेरे प्रिय उद्धरण और कृति-अंश : कुतुबनुमा से दिशा दिखाते, राह बताते शब्द
मेरी प्रिय कविताएं: क्षितिज पर जलती मशालें दण्डद्वीप से दिखती हुई
देश-काल-समाज: वाद-विवाद-संवाद
विविधा: इधर-उधर से कुछ ज़़रूरी सामग्री
जीवनदृष्टि-इतिहासबोध
Thursday, November 01, 2018
जब हवा और शीत ऋतु सख्त बना देंगी
सारी प्यारविहीन धरती को,
तब बाग़ की फुसफुसाहट,
तुम समझोगी !
--- ऑस्कर वाइल्ड
('पत्नी के लिए')
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment