कवि अगर जनजीवन और जनसंघर्षों के बीच है तो दुर्भाग्य, दुखों और दुस्वप्नों से भी जीवन-राग छान लेता है I बाकी जो ज्यादातर कवि हैं, वे कचहरी के नकलनवीस और म्यूनिसिपैलिटी के मुदर्रिस हैं, विदूषक और चारण हैं, रंगीन काग़ज़ में लपेटकर मिलावटी और सड़ा माल बेचने वाले पंसारी और फेरीवाले हैं I
(13सितम्बर,2018)
No comments:
Post a Comment