Sunday, September 23, 2018

आज भारत और नेपाल की कई "प्रगतिशील" और नारीवादी स्त्रियाँ...



आज भारत और नेपाल की कई "प्रगतिशील" और नारीवादी स्त्रियाँ, जिनमें कुछ कवयित्रियाँ भी शामिल हैं, तीज मनाते हुए अपनी तस्वीरें डाल रही हैं ! पता नहीं, यह हरियाली तीज है, कजरी तीज या हरितालिका तीज --- जो भी हो, यह त्यौहार स्त्रियाँ अपने पति और परिवार की कुशलता और कल्याण के लिए मनाती हैं I ऐसे ही मौके होते हैं जब हिन्दू सन्नारियों की सारी प्रगतिशीलता प्याज के छिलके की तरह उतर जाती है I यह नहीं समझ आता कि पत्नी और परिवार के कुशल-क्षेम के लिए मर्द कोई व्रत-त्यौहार क्यों नहीं करते ? हे विकट प्रगतिशील कवयित्रियो ! यह बात तुम्हारे भेजे में क्यों नहीं घुसती ? अब कृपा करके संस्कृति, परम्परा और जन से जुड़ने का बोदा तर्क मत देने लगना ! धर्म संस्कृति का संघटक अवयव नहीं होता I और तीज कोई मौसमी-फसली त्यौहार भी नहीं है, यह स्त्रियों की पुरुषसत्तात्मक गुलामी और पारिवारिक गुलामी का वह जश्न है जो गुलामों के मालिकों ने गुलामों पर थोप दिया है I हे करवा-चौथ और तीज मनाने वाली हिन्दू आधुनिकाओ ! आप व्रत-उपवास करो, पर मेरी मित्र-सूची से बाहर जाओ ! समय नहीं है, नहीं तो मैं ही बीन-बीन कर निकाल देती !
(12सितम्‍बर,2018)

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