आज भारत और नेपाल की कई "प्रगतिशील" और नारीवादी स्त्रियाँ, जिनमें कुछ कवयित्रियाँ भी शामिल हैं, तीज मनाते हुए अपनी तस्वीरें डाल रही हैं ! पता नहीं, यह हरियाली तीज है, कजरी तीज या हरितालिका तीज --- जो भी हो, यह त्यौहार स्त्रियाँ अपने पति और परिवार की कुशलता और कल्याण के लिए मनाती हैं I ऐसे ही मौके होते हैं जब हिन्दू सन्नारियों की सारी प्रगतिशीलता प्याज के छिलके की तरह उतर जाती है I यह नहीं समझ आता कि पत्नी और परिवार के कुशल-क्षेम के लिए मर्द कोई व्रत-त्यौहार क्यों नहीं करते ? हे विकट प्रगतिशील कवयित्रियो ! यह बात तुम्हारे भेजे में क्यों नहीं घुसती ? अब कृपा करके संस्कृति, परम्परा और जन से जुड़ने का बोदा तर्क मत देने लगना ! धर्म संस्कृति का संघटक अवयव नहीं होता I और तीज कोई मौसमी-फसली त्यौहार भी नहीं है, यह स्त्रियों की पुरुषसत्तात्मक गुलामी और पारिवारिक गुलामी का वह जश्न है जो गुलामों के मालिकों ने गुलामों पर थोप दिया है I हे करवा-चौथ और तीज मनाने वाली हिन्दू आधुनिकाओ ! आप व्रत-उपवास करो, पर मेरी मित्र-सूची से बाहर जाओ ! समय नहीं है, नहीं तो मैं ही बीन-बीन कर निकाल देती !
(12सितम्बर,2018)

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