देश भूतों का आश्चर्यलोक बन चुका है ! यहाँ जो यथार्थ है, वह इतना जादुई है कि मार्खेज भी दंग रह जाते ! इस यथार्थ को प्रकट करने के लिए किसी जादुई यथार्थवादी शैली की ज़रूरत नहीं है, इसका यथातथ्य आख्यान ही जादुई यथार्थवाद बन जाएगा !
यहाँ लड़कियाँ खुद ही अपना बलात्कार करके अपनी जीभ काट ले रही हैं, रीढ़ की हड्डी तोड़ ले रही हैं, या दोनों पैर और कमर तोड़ ले रही हैं, या अपना सिर ईंट से कूँच ले रही हैं !
28 साल बाद पता चलता है कि सहसा बाबरी मस्जिद इस अपराध-बोध से भरभरा कर गिर पड़ी कि वह राम के जन्मस्थल पर खड़ी थी !
व्यापम और तमाम घोटालों के या आशाराम और चिन्मयानंद के बलात्कारों के तमाम गवाह इच्छा-मृत्यु का वरण कर लेते हैं, या उन्हें सहसा पता चलता है कि वे मतिभ्रम या दृष्टिभ्रम के शिकार थे !
महत्वपूर्ण फैसला देने वाले जज अचानक दिल के दौरे से मर जाते हैं, जीपें पलट जाती हैं, मंत्रालयों में फाइलों में आग लग जाती है !
ऐसे चमत्कारी घटनाएँ तो अरसे से जारी हैं ! लोग पता नहीं, किसक़दर मतिभ्रम के शिकार हो रहे हैं ! अरसे बाद पता चलता है कि 2002 में गुजरात में कोई नरसंहार ही नहीं हुआ था और सैकड़ों औरतों को अपने साथ सामूहिक बलात्कार का भ्रम हुआ था ! सोहराबुद्दीन, तुलसी प्रजापति, हीरेन पांड्या आदि को किसी ने नहीं मारा ! जिन सैकड़ों लोगों की ह्त्या की बात होती है, उनका कोई अस्तित्व ही नहीं था ! अखलाक, पहलू खान, जुनैद आदि दर्ज़नों लोगों के मॉबलिंचिंग की घटनाएँ किसी अफवाहबाज़ या गंजेड़ी की कल्पना की उड़ान है !
लोग इसतरह दृष्टिभ्रम के शिकार हो रहे हैं कि निरंतर प्रगति करता देश उन्हें विनाश के रसातल में जाता दिखाई दे रहा है !
पर कोई बात नहीं, मोदीजी शाहजी, डोभालजी, योगीजी, शिवराजजी, येदियुरप्पाजी आदि-आदि के साथ मिलकर जनता की इस मानसिक बीमारी का इलाज करने के लिए मुस्तैद हैं !
पर कुछ लोग कह रहे हैं कि जनता ही मोदीजी एंड कंपनी का जादुई नुस्खे से इलाज करने वाली है ! अब उड़ाने वाले तो तरह-तरह की अफवाहें उड़ाते ही रहते हैं !
अब राम जाने, सच क्या है ! हम तो ज़िंदगी और सपनों -- दोनों के रिपोर्टर हैं ! जो देख-सुन रहे हैं, सब लिख दे रहे हैं ! बाकी आप लोग जानें ! कभी-कभी सच को जानने के लिए मामूली अखबारी रिपोर्ट की भी डिकोडिंग करनी पड़ती है !
(1 Oct 2020)

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