Tuesday, October 13, 2020

कवि और कविता...

कवि को रात से बेचैनी महसूस हो रही थी । साँस लेने में दिक्कत हो रही थी । गैस भी बहुत भर गयी थी पेट में । फिर ज़ोर की कविता आई । लिख डाला । फेसबुक पर भी डाल दिया । अब जाकर राहत मिली है । चैन की नींद सो रहा है ।

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एक कवि को कोरोना हो गया । अस्पताल में भर्ती हुआ । डाक्टर ने कहा,"अच्छा, तो आप कवि हैं ! कुछ सुनाइये ।" कवि ने बुरी हालत में भी तीन-चार कविताएँ सुना डालीं । कवि जल्दी ही ठीक हो गया । डाक्टर अब कोरोना वार्ड में वेंटिलेटर पर है ।

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एक कवि मरणासन्न था । सभी स्वजन-परिजन जुटे थे । मुँह में गंगाजल डाला जा चुका था । उसका एक पुराना श्रोता मित्र भी मौजूद था । उसने कहा,"कुछ सुनाइए !" कवि की आँखें झपकीं, बदन में कुछ हरक़त हुई और वह फुसफुसाती सी आवाज़ में कविता सुनाने लगा । फिर वह उठंगकर थोड़ी साफ़ आवाज़ में कविता सुनाने लगा । दो घंटे बाद वह बैठकर टन्नाकेदार आवाज़ में कविता पढ़ रहा था । रात बहुत हो चुकी थी । कवि को उसके श्रोता के साथ छोड़कर घरवाले सोने चले गये । सुबह जब लोग कमरे में आये तो श्रोता मरा पड़ा था और कवि मेज़ पर बैठा एक नयी कविता लिख रहा था ।

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(13 Oct 2020)

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