मध्यवर्गीय बौद्धिक समाज की नौटंकियाँ आपने देखी हैं ? जैसे ही रथों पर आरूढ़ राजपुरुष विविध अलंकरण, पुरस्कार, नियुक्ति पत्र, ताम्रपत्र आदि लिए हुए संस्कृति उद्यान की वीथिका पर प्रवेश करते हैं, सभी संस्कृति-पुरुष दौड़ पड़ते हैं । वे सभी अपने मुँह खोलकर दिखाते हैं कि उनकी तो ज़ुबान ही नहीं है । और फिर यह साबित करने के लिए कि उनकी रीढ़ की हड्डी भी नहीं है, वे ज़मीन पर केंचुए की तरह रेंग-रेंग कर दिखाने लगते हैं ।
(30 Sep 2020)

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