Sunday, August 23, 2020

 

जो डरे वो तिलचट्टा !

जो चुप रहे उसके मुंह में गू !

-- झंझटी देवी झंझारपुर वाली।


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फ़ासिस्टों के सामने शान्तिपाठ करने वाले लिबरल घोंचुओं पर हज़ार लानतें !

बर्बर हत्यारों के दरबारी बने कलावंतों और आलिमों के मुंह पर त्थू ! आक्त्थू !!

-- झंझटी देवी, झंझारपुर वाली ।

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