आज की दुनिया: आज का जीवन :एक तस्वीर
यह है आज के रोगी, बूढ़े, मानवद्रोही पूँजीवादी समाज की एक तस्वीर ! अंधी प्रतिस्पर्द्धा,भेड़ियाधसान, सिक्के की धुरी पर नाचती धरती, लोभ-लाभ की संस्कृति का वर्चस्व, 'कमोडिटी फेटिशिज्म', बाज़ार का वर्चस्व, उजरती गुलामी, हिंसा और रुग्ण कामुकता का संसार, अलगाव, अवसाद, विमानवीकरण, जुआ, सट्टेबाज़ी, पूँजी द्वारा अभिमंत्रित मानस, यंत्र मानवों में बदलते लोग, मुनाफे की हवस के हाथों तबाह होता पर्यावरण, अभाव और असह्य जीवन के सागर में समृद्धि और विलासिता के द्वीप, फासिस्ट बर्बरता ... !
अगर आप जीवित हैं तो इन सारी चीज़ों से असम्पृक्त, तटस्थ और निष्क्रिय भला कैसे बने रह सकते हैं ? उम्मीदें अगर थोड़ी भी हों तो भी कोशिश तो करनी ही होगी ! और कौन कहता है की उम्मीदें थोड़ी हैं ? यह कोई इतिहास का अंत थोड़े ही है ! अब तक का इतिहास तो प्राक-इतिहास है ! मनुष्यता का इतिहास तो आगे लिखा जाना है, सुरीले षट्पदी छंदों में, एक महाकाव्य के रूप में !
(28अगस्त, 2019)
*********
एक भक्त दूसरे भक्त को बता रहा था,"तालस्ताय खान दरअसल एक तालिबान है जिसने अफगानिस्तान में आतंकवादी कार्रवाइयों पर एक किताब लिखी है,'युद्ध और शांति'। भारत के अर्बन नक्सल उस किताब को खूब पढ़ते हैं ।"
(29अगस्त, 2019)
**********
एक जज ने दूसरे जज को, जो रिश्ते में उसका फूफा लगता था, फोन किया,"फूफाजी, आप वाले के पास तो सिर्फ़ 'युद्ध और शांति' ही मिली है न! मेरे कोर्ट में कल जिसकी पेशी है उसके फ्लैट से एक किताब मिली है,'दस दिन जब दुनिया हिल उठी।' लगता है साला 9/11 से भी ख़तरनाक़ कुछ प्लान कर रहा था! बड़े खूंख्व्वार हैं भई ये सब! छोडूँगा नहीं फूफाजी मैं तो इस अर्बन नक्सल को! कभी दिन की रोशनी देखने नहीं दूँगा! हाँ नहीं तो!
(29अगस्त, 2019)
***********
कृश्नचन्दर का लिखा एकमात्र जासूसी उपन्यास है, 'हांगकांग की हसीना।' एक बुजुर्ग साथी के पास थी। जला दिया। कह रहे थे,"एक तो टाइटल से किताब थोड़ी गंदी टाइप लग रही थी। अब इस उम्र में किसी ऐसे-वैसे अभियोग में गिरफ्तारी-पेशी और सज़ा...ना बाबा ना! दूसरे, टाइटल से यह भी तो लग सकता है कि मेरा हांगकांग से कोई कनेक्शन है और मैं भारत में, कश्मीर में या कहीं और हांगकांग जैसा कोई आंदोलन खड़ा करना चाहता हूँ।"
(29अगस्त, 2019)
***********
एक भक्त साहित्य-प्रेमी था! प्रसाद की कविताएँ संस्कृत भाषा में होने के कारण नहीं समझ पाता था, लेकिन श्याम नारायण पाण्डेय और कुछ और वीर रस के कवियों की कविताएँ पढ़ रखी थीं! रामचरित मानस, हनुमान चालीसा, महाभारत और गीता प्रेस से प्रकाशित सभी भजन- संग्रह और नीति-कथाएँ उसने पढ़ रखी थीं! फिर उसकी रुचि आधुनिक साहित्य में जागी! कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी, गुरुदत्त, चतुरसेन शास्त्री, नरेंद्र कोहली आदि को पढ़कर वह मुग्ध होता चला गयाI फिर उसको पता चला कि दुनियाभर में मशहूर हिन्दी के एक लेखक हुए हैं निर्मल वर्मा जो हिंदुत्व की संस्कृति और राजनीति का समर्थन करते थेI
फिर क्या था! पास की पब्लिक लाइब्रेरी से भक्त ने निर्मल वर्मा का एक उपन्यास 'वे दिन' और एक कहानी संकलन 'जलती झाड़ी' ढूँढ निकाला और घर आते ही पढ़ने बैठ गया! जितना पढ़ता गया, उतना ही दिल बैठता गया! कनपटियों पर जैसे कोई हथौड़े मार रहा था! राम-राम! इतना अधर्म! इतनी अनैतिकता! इतनी अश्लीलता! उसे लगा कि उसके साथ मजाक किया गया है! भागता हुआ वह मोहल्ले के गुरुजी के पास गया जो शाखा संचालक होने के साथ ही शिशु मंदिर के आचार्य भी थे!
"यह है हिंदुत्व की संस्कृति का समर्थक लेखक? पथभ्रष्ट! अनैतिक! दुराचारी! पापी! सिर्फ सुरा और सुन्दरी की चर्चा! तरह-तरह के शराबों की चर्चा! स्त्रियों के साथ वो सब करने का कुत्सित वर्णन! भारत की कोई बात ही नहीं! सिर्फ़ पश्चिमी देशों की बातें! अरे यह तो कोई ख्रिस्तानों का एजेंट है! या विदेशी एजेंट है!" -- किताबें पटकते हुए भक्त चीखा !
आचार्यजी थोड़ी देर किताबें पलटते रहे, फिर बोले,"यह तो कोई भारी जालसाज़ी लगती है! लगता है निर्मल वर्मा के नाम पर किसी विधर्मी-देशद्रोही ने अंटशंट लिख मारा है ! तुम उनकी पुस्तक 'लाल तीन की छत' पढ़ना! उसमें बताया गया है कि किस तरह सरकारी ज़मीन पर बने हरे टीन की छत वाले मदरसे को हटाकर तीन हिन्दू वीरों ने वहाँ हनुमानजी का मंदिर स्थापित किया था, जिसकी लाल टीन की छत थी ! और उनकी 'माया-दर्पण' कहानी पढ़ना ! बड़ी धार्मिक कथा है ! बताती है कि यह दुनिया माया है और हमारा मन उसका दर्पण! पढ़कर एकदम वैराग्य का भाव उपजता है!"
भक्त संतुष्ट था, पर आचार्यजी चिन्तित थे कि वह कहीं निर्मल वर्मा की उनके द्वारा बतायी गयी किताबें ढूँढ ही न ले, क्योंकि वह भी नहीं जानते थे कि उनमें क्या लिखा है!
अब अगली ही मुलाक़ात में वह भक्त को बताने वाले थे कि ज्ञानमार्ग का युग बीत चुका है ! अब सिर्फ भक्तिमार्ग और कर्ममार्ग का युग है ! अतः पढ़ना-लिखना बंद! गुरुओं और नेताओं की बात सुनो और बस वही करो जैसा वे कहें!
(29अगस्त, 2019)
**********
डाक्टर नवमीत के पास 'गबन' भी था और 'चरित्रहीन' भी ! 'वर्दीवाले गुंडे' ने गिरेबान पकड़कर झिंझोड़ते हुए कहा,"एक तो गबन करता है, दूसरे, चरित्रहीन भी है ! अबतक भाजपा क्यों नहीं ज्वाइन किया बे ? बहाना मती मारना ! सच्ची बात उगल जल्दी से!"
(29अगस्त, 2019)

No comments:
Post a Comment