चूँकि मैं रुक नहीं सकी मृत्यु के लिए,
वह रुकी मेरे लिए अनुग्रहपूर्वक;
सवारी गाड़ी में सिर्फ़ हम दो थे
और अमरत्व था I
--- एमिली डिकिन्सन
('चूँकि मैं रुक नहीं सकी मृत्यु के लिए')
.
#कवितापंक्तियाँ_दिलमें_गहरेतक_धँसीहुई
*******
उम्मीद पंखों वाली वो शै है
जो रूह में बसेरा बनाती है
और बगैर अल्फ़ाज़ के नग़मे सुनाती है
और कभी रुकती नहीं !
-- एमिली डिकिन्सन

No comments:
Post a Comment