Thursday, November 01, 2018

एमिली डिकिन्सन


चूँकि मैं रुक नहीं सकी मृत्यु के लिए,

वह रुकी मेरे लिए अनुग्रहपूर्वक;

सवारी गाड़ी में सिर्फ़ हम दो थे

और अमरत्व था I

--- एमिली डिकिन्सन
('चूँकि मैं रुक नहीं सकी मृत्यु के लिए')
.
#कवितापंक्तियाँ_दिलमें_गहरेतक_धँसीहुई


*******



उम्मीद पंखों वाली वो शै है

जो रूह में बसेरा बनाती है

और बगैर अल्फ़ाज़ के नग़मे सुनाती है

और कभी रुकती नहीं !

-- एमिली डिकिन्सन

No comments:

Post a Comment