”ज़माने के जिस दौर से हम गुज़र रहे है अगर आप उससे वाकिफ़ नहीं तो मेरे अफसाने पढि़ये और अगर आप इन अफसानों को बरदाश्त नहीं कर सकते तो इसका मतलब है कि ज़माना नाकाबिले बर्दाश्त है , मेरी तहरीर में कोई नुक्स नहीं। जिस नुक्स को मेरे नाम से मनसूब किया जाता है वह दरअसल मौजूदा निज़ाम का नुक्स है। मैं सोसायटी की चोली क्या उतारूंगा वो तो है ही नंगी।"
--सआदत हसन मंटो
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