Sunday, January 02, 2011

मेरे प्रिय उद्धरण और कृति-अंश: कुतुबनुमा से दिशा दिखाते, राह बताते शब्‍द

विज्ञान के नियम देश-काल से, सत्‍ता और समाज से निरपेक्ष नहीं हुआ करते। यदि ऐसा होता तो भला यह क्‍यों होता E=mc² का सूत्र प्रयोग में आता और दुनिया के नक्‍शे से दो शहरों का वजू़द ही मिट जाता है।

-बेर्टोल्‍ट ब्रेष्‍ट 

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