Wednesday, September 23, 2020


ज्यादा नहीं, अभी तीन दिन पहले की ही बात है ! मेरे  परिचित दम्पति हैं I मैं उनके एकदम पड़ोस में एक दोस्त के वहाँ कुछ दिनों से रुकी हुई हूँ I ज्यादा नहीं बताऊँगी, पहचान उजागर नहीं करनी है ! पत्नी शिक्षिका और साहित्य-प्रेमी हैं ! पति कविताएँ लिखते हैं ! 

वो कहते हैं न ! एक साथ रखे बर्तन आपस में टकरा जाते हैं कभी-कभी ! सो तीन दिन पहले टकरा गए I और टकराए तो यूँ गोया कोई आतिशफ़िशां पहाड़ फट पड़ा I बोन चाइना का डाइनिंग सेट ही नहीं चकनाचूर हुआ, प्रेशर कुकर और कुछ भगोने भी पिचक गए I गुम चोटों के अलावा वो दीखने वाली चोटें भी लगीं जो नामुराद चीख-चीखकर अगले दिन मुहल्ले भर को गुज़री रात की दास्ताँ बयान कर देती हैं !

 लेकिन एक ख़ास बात यह थी कि इस युद्ध में 'कम्प्लीट जेंडर इक्वलिटी' थी ! ये नहीं कि खाविंद महोदय दो-चार लगाकर निकल लें ! मोहतरमा ने भी दुश्मन के हर हमले का तुर्की-ब-तुर्की जवाब दिया, यूँ कहें कि ईंट का जवाब पत्थर से दिया I

बहरहाल, इसी बीच फेसबुक पर यह नामुराद कपल चैलेंज का सिलसिला चल निकला ! अब मियाँ-बीवी पूरे सरोकार के साथ एक-दूसरे की जाहिर चोटों का मुआयना कर रहे  हैं कि चेहरे फोटू उतरवाने के क़ाबिल कबतक हो सकेंगे ! बेग़म की सलाह थी कि कोई पुरानी, चीख-चीख कर मुहब्बत की गवाही देती फोटू ही चिपका देते हैं ! पर मियाँ को यह तजवीज रास नहीं आयी I वो ताज़ा फोटू लगाने पर अड़े हुए थे I 

इसपर बीवी ने थोड़ा ज़हर घोलकर शीरीं जुबां में बोल दिया," तो जानम, क्यों न जैसी हमारी इस वक़्त शक्लें हैं, उनको ही तस्वीरों में उतारकर पेश कर दिया जाए ? लोगों के सामने यह हक़ीक़त ख़ुद-ब-ख़ुद बयां हो जायेगी  कि हमलोग इनदिनों किस क़दर इश्क़-ओ-रूमान के समंदर में डूबे हुए हैं !"

 बेगम का इतना कहना ही था कि फिर जैसे किसी ने बारूद की ढेरी को पलीता लगा दिया ! झगड़ा फिर शुरू हो गया ! अभी जारी है I

 मैं बत्ती बुझाकर लेटे-लेटे खिड़की से देख रही हूँ कि नए सिरे से भड़क उठी यह तीसरी आलमी जंग कबतक चलती है और किस अंजाम तक पहुँचती है ! 

देखें, वक़्त रहते 'कपल चैलेंज' वाली फोटो फेसबुक पर पड़ भी पाती है या नहीं !

(23sep.2020)

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