अमेठी में सेना के रिटायर्ड कैप्टेन अमानुल्लाह की मॉब लिंचिंग की खबर अभी बासी भी नहीं पड़ी थी कि चंदौली जिले के सैयद राजा बाज़ार से हिंदुत्व फासिज्म के नशे में पगलाए आदमखोरों के अगले शिकार की खबर भी आ गयी ! इस बार बर्बरों ने कक्षा 9 में पढ़ने वाले बच्चे ख़ालिक अंसारी को घेरकर उसे 'जय श्रीराम' का नारा लगाने के लिए बाध्य किया और फिर केरोसिन तेल उड़ेलकर उसे जला दिया ! कबीरचौरा सरकारी अस्पताल के बर्न वार्ड न.3 में 70-80 प्रतिशत जल चुके ख़ालिक को भरती किया गया, लेकिन अभी प्राप्त सूचना के अनुसार यह बच्चा मौत से अपनी जंग हार चुका है !
मॉब लिंचिंग और धार्मिक अल्पसंख्यकों और दलितों को अलगाव और आतंक की काली छाया में धकेलने का काम पूरे देश में, विशेषकर उत्तर भारत और कर्नाटक में जोर-शोर से जारी है I गोदी मीडिया द्वारा गाए जा रहे चारण-राग के शोर में इस आतंक की विषैली फुफकारें लोगों को सुनाई नहीं पड़ रही हैं ! उधर आज़ाद भारत के सबसे दमनकारी और सबसे काले क़ानून संसद में एक के बाद एक पास हो रहे हैं ! विपक्षी बुर्जुआ दल घुटने टेक चुके हैं फासिस्टों के सामने ! वे ढंग से विरोध की रस्म-अदायगी भी नहीं कर पा रहे हैं ! और सड़क पर विरोध क्या करेंगे जब सड़क पर उतरने वाले कैडर ही किसी के पास नहीं हैं !और नेता गण तो सी.बी.आई., ई.डी. एस.आई.टी. आदि के छापों की धमकी से ही टॉयलेट में जा बैठ रहे हैं और वहीं से भाजपा में घुसकर अभय हो जाने के बारे में सोचने लग रहे हैं ! संसदीय वामपंथी बिचारे संसद में कुछ भाषण-भूषण दे लेने के अलावा कर भी क्या सकते हैं ! स्वयं सत्ताधर्मी बने, महज अर्थवादी संघर्षों में उलझाकर मज़दूर आन्दोलन की जुझारू वर्ग-चेतना को कुंद किया और उसे दन्त-नख-हीन बनाया, और अब करम कूट रहे हैं ! इतिहास इन्हें क्रान्ति से विश्वासघात करने का दंड दे रहा है -- सिर्फ़ बंगाल में ही नहीं, पूरे देश में !
उधर नीरो मस्त-मगन लगातार बाँसुरी बजाये जा रहा है ! उसकी धुन पर सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक लाखों विषधर झूम रहे हैं, फुँफकार रहे हैं और डंस रहे हैं I नीरो बीच-बीच में बालकनी से उठकर भीतर जाता है और ड्रेस बदलकर आकर फिर बाँसुरी बजाने लगता है ! कभी-कभी वह दरबारियों को वही धुन बजाते रहने के लिए कहकर 'मैन वर्सेज वाइल्ड' का स्पेशल एपिसोड शूट करवाने चला जाता है !
पार्कों में, बसों-ट्रेनों में, सड़कों पर लोगों की बातें सुनिए ! ज़हर सचमुच गहरे, बहुत गहरे पैठ चुका है ! हम एक बीमार, बेहद बीमार समाज में जी रहे हैं !
कुछ थोड़े से लोग हैं जो लगातार लोगों को आगाह करते हुए आवाज़ें लगा रहे हैं ! पर देश की बहुलांश आबादी अभी नशे की गहरी नींद में लोहे की दीवारों के पीछे बेसुध पड़ी है ! बेशक लोगों को होश आयेगा, वे जागेंगे, पर कितनी बरबादियों के बाद ? -- यह एक बड़ा सवाल है ! नीरो के खूनी दस्ते लगातार लोगों को आगाह करने वाली आवाज़ों की शिनाख्त कर रहे हैं ! समय-समय पर कुछ आवाज़ें चुप भी कर दी जाती हैं, लेकिन लोगों को जगाने वाली आवाज़ें जारी रहती हैं और तमाम आतंक के माहौल के बावजूद उनमें कुछ नयी आवाज़ें भी शामिल होती रहती हैं !
(30जुलाई, 2019)

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