Friday, September 11, 2020

कुत्त-कविता

 


ज़िन्दगी जब इतनी कुत्ती-कुत्ती सी हो गयी हो तो कुत्त-कविता की विधा के फलने-फूलने के लिए अनुकूल वातावरण तो बन ही जायेगा ! तो लीजिये, प्रस्तुत है, अगली कुत्त-कविता !

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कुत्ता बोला कुत्ती से, क्या चलेगी लुटियन जोन 

बोलो तो मामाजी को मैं अभी लगाऊँ फोन 

कुत्ती बोली, लुटियन में हम भला रहेंगे कैसे 

हमसे बड़े-बड़े कुत्तों का जन्नत है वह जैसे 

कुत्ता बोला, धत पगली, तू घबराती है यूँ ही 

लुटियन में जब जम जायेंगे, मौज करेंगे त्यूँ ही 

लुटियन पहुँचे देसी कुत्ते झट इलीट बन जाते 

कुत्ते ग्लोबल हों या लोकल, भौकाली हो जाते 

दिल्ली की इलीट कुत्ता-सर्किल में जलवा चौचक 

देसी हैं हम,   ठाट करेंगे,   यूँ न देख तू भौंचक

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'लॉन्ग लिव द स्कूल ऑफ़ कुत्त-पोएट्री'

(11 Sep 2020)


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