Thursday, February 22, 2018




किसी भी पूँजीवादी गणतंत्र में सरकारें पूँजीपतियों की मैनेजिंग कमेटी होती हैं। सरकार चाहे जितनी दमनकारी हो, वह यदि पूँजीपतियों के हितों की सेवा करती है, तो वे अपनी थैलियों का मुँह उस पार्टी के लिए खोल देते हैं जिसकी सरकार होती है।
इतिहासकार हॉब्सबाम ने लिखा है कि जर्मनी के बड़े औद्योगिक घराने पहले हिटलर के साथ नहीं थे। मंदी शुरू हुई तो उन्होंने हिटलर की मामूली मदद की। एक बार जब वह सत्ता में आ गया तो वे खुलकर उसके साथ खड़े हो गए। यंत्रणा शिविरों के गुलामों से काम लेने में भी उन्हें कोई झिझक नहीं महसूस हुई I कम्युनिस्टों को और ट्रेड यूनियन आन्दोलन को कुचलकर नात्सियों ने मंदी का सामना करने में पूँजीपतियों की मदद की।
भारत की वर्तमान स्थिति को हिटलरकालीन जर्मनी के अनुभवों की रोशनी में आसानी से समझा जा सकता है। इतिहास से हमें ज़रूरी सबक मिलते हैं, हालाँकि इतिहास अपने को हूबहू नहीं दुहराता।

(22 फरवरी,2018)



No comments:

Post a Comment