Tuesday, February 13, 2018





देश में फासिस्ट बर्बरता का कहर लगातार जारी है I समाज के पोर-पोर में अमानवीयता भरती जा रही है I इधर हिन्दी में "निष्कलुष", "अलौकिक" प्रेम कविताओं का घटाटोप छाया हुआ है ! क्या प्रेम इतना असामाजिक होता है, इतना अमानवीय ?? कौन हैं राजनीति से विरत ये प्रेमी जीव ??

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