Tuesday, December 19, 2017

एक अर्जित स्वप्न की कथा



कभी एक स्वप्न को मैंने
आमंत्रित किया था
दुखों के एक अकेले निर्जन द्वीप पर
पर मैं वहाँ खुद ही
नहीं पहुँच पाई समय पर ।
फिर कविता ने मुझे आमंत्रित किया
एक शाम साथ बिताने को
निर्वासितों की घाटी में ।
वहाँ तक पहुँचने के लिए
बनैले समय में मुझे
बर्बर गद्य की सड़कों से
होकर जाना था
और विचारहीन आलोचना की कई चुंगियों से
और कल्पनाहीन-सी कल्पनाओं और
अवास्तविक-सी वास्तविकताओं के
कई बाज़ारों से गुज़रना था ।
मैंने कविता तक पहुँचने के लिए
शक्तिशाली हमलावरों द्वारा
विस्थापित कर दिए गए लोगों
और पीछे धकेल दिए गए योद्धाओं से भरे
जंगल से गुज़रने की राह चुनी
एक छापामार की तरह ।
वहाँ मुझे
एक स्वप्न मिला
कठिनाई से अर्जित
यथार्थ की तरह ।
-- कविता कृष्‍णपल्‍लवी


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