Wednesday, May 24, 2017



वे हमारे ऊपर गालियों की बौछार करते हैं ।
हम प्रतिरोध के गीत गाते हैं ।
वे बौखलाते हैं ।
वे हमें धमकियाँ देते हैं । 
हम फिर निर्भीक सड़कों पर निकलते हैं
आकाश गुंजाते नारों के साथ ।
वे बदहवास हो जाते हैं ।
वे हमें यंत्रणा देते हैं कारागृहों में ।
हम दीवारों पर उम्मीदों, विद्रोह और जीत के
चित्र उकेरते हैं।
उन्हें अपने विनाश के दुःस्वप्न सताने लगते हैं।

No comments:

Post a Comment