Wednesday, May 24, 2017



कार्ल मार्क्स की युगांतरकारी कृति 'पूँजी' खंड-1 के प्रकाशन की 150वीं वर्षगाँठ के अवसर पर
"यदि मार्क्स ने अपने पीछे 'तर्कशास्त्र' नहीं छोड़ा , तो उन्होने 'पूँजी' का तर्क अवश्य ही छोड़ा ... 'पूँजी' में मार्क्स ने एक ही विज्ञान पर तर्कशास्त्र , द्वन्द्ववाद और भौतिकवाद के संज्ञान का सिद्धान्त (तीन शब्दों की आवश्यकता नहीं है : यह एक ही बात है ) लागू किया , जिसने हेगेल से सभी मूल्यवान चीज़ों को आत्मसात किया है और उन्हे विकसित किया है ।"
---व्ला. इ. लेनिन 
'हेगेल के द्वंद्ववाद (तर्कशास्त्र) की योजना' , 1915

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