Thursday, February 04, 2016

सबसे बड़ी बात है सच को जानना एक साथ मिलकर




जो लोहा गलाते हैं
और धरती खोदकर खनिज निकालते हैं
और अनाज उपजाते हैं,
उनकी ज़ि‍न्‍दगी कब्रिस्‍तान जैसी होती है,
आँखें पथरायी रहती हैं
और सपनों को दीमक चाटते रहते हैं
और सूझ-बूझ को लकवा मारे रहता है
जबतक कि वे बँटे रहते हैं खण्‍ड-खण्‍ड में
जाति, धर्म और इलाके के नाम पर
और जबतक ऐसे मर्द खुद ही औरतों को
दबाते रहते हैं।
जैसे ही गिरती हैं ये दीवारें
दुनिया की सारी सम्‍पदा के निर्माताओं को
अहसास हो जाता है अपनी गुलामी का
और अपनी अपरम्‍पार ताकत का।
फिर वे उठ खड़े होते हैं
और एक विशाल लोहे की झाड़ू थाम्‍हे
अपनी बलशाली भुजाओं में
अनाचार-अत्‍याचार-लूट और गुलामी की
सफाई करते हैं पूरी पृथ्‍वी से
और उसे एक गठरी की तरह बाँधकर पीठपर
एक सुन्‍दर, मानवीय, शोषणमुक्‍त भविष्‍य की यात्रा पर
निकल पड़ते हैं।
हालात बदले जा सकते हैं निश्‍चय ही
यदि हम सच को जान लें
और सारे भ्रमजालों को भी
एक साथ मिलकर।


-- कविता कृष्‍णपल्‍लवी

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