Wednesday, August 06, 2014

वे क्षुद्र संख्‍याएँ और लोग




कहाँ पर लोग 'प्रति व्‍यक्ति आय' कमाते हैं? कई ग़रीब, भुखमरी की शिकार आत्‍माएँ यह जानना चाहेंगी।
हमारे देशों में संख्‍याएँ लोगों से बेहतर ज़ि‍न्‍दगी जीती हैं। समृद्धि के दिनों में कितने लोग समृद्ध होते हैं? विकास के द्वारा कितने लोग अपनी ज़ि‍न्‍दगियों को विकसित होते पाते हैं?
क्‍यूबाई क्रांति उस द्वीप के इतिहास में सर्वाधिक समृद्धि के वर्ष में विजयी हुई थी।
मध्‍य अमेरिका में लोग जितने ही अभागे और हताश रहे हैं, सांख्यिकी उतना ही अधिक मुस्‍कुराती और खिलखिलाती रही हैं। पचास, साठ और सत्‍तर के तूफानी दशकों के दौरान, उथल-पुथल भरे दौर में मध्‍य अमेरिका विश्‍व में सर्वोच्‍च आर्थिक विकास दरों और मानव-सभ्‍यता के इतिहास में सर्वाधिक व्‍यापक क्षेत्रीय विकास की डींगें हाँक रहा था।
कोलम्बिया में खून की नदिया सोने की नदियों में मिल जाती हैं। अर्थव्‍यवस्‍था के प्रभामण्‍डल, सस्‍ती मुद्रा के वर्ष: उल्‍लासोन्‍माद के बीच देश पागलपन भरी प्रचुरता के साथ कोकीन, कॉफी और अपराध पैदा करता रहता है।

-- एदुआर्दो गालिआनो
(द बुक ऑफ एम्‍ब्रैसेज़)

1 comment:

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