Monday, June 18, 2012

पॉल रॉबसन से - नाज़ि‍म हिकमत










वे हमें अपने गीत नहीं गाने देते हैं, रॉबसन,
ओ गायकों के पक्षीराज नीग्रो बन्‍धु,
वे चाहते हैं कि हम अपने गीत न गा सकें।
डरते हैं रॉबसन,
वे पौ के फटने से डरते हैं।
देखने,
सुनने,
छूने से
डरते हैं।
वैसा प्रेम करने से डरते हैं
जैसा हमारे फरहाद ने प्रेम किया
(निश्‍चय ही तुम्‍हारे यहां भी तो कोई फरहाद हुआ,
रॉबसन, नाम तो उसका बताना जरा)
उन्‍हें डर है
बीज से,
पृथ्‍वी से,
पानी से,
और वे
दोस्‍त के हाथ की याद से डरते हैं -
जो हाथ कोई डिसकाउण्‍ट, कमीशन या सूद नहीं मांगता
जो हाथ उनके हाथों में किसी चिड़ि‍या-सा फंसा नहीं।
डरते हैं नीग्रो बन्‍धु,
वे हमारे गीतों से डरते हैं रॉबसन।

                (अंग्रेजी से अनुवाद:चन्‍द्रबली सिंह)

1 comment:

  1. बहुत सुन्दर....................
    कविता भी और अनुवाद भी....

    अनु

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