Sunday, January 09, 2011

मेरी कविताई: जीवन की धुनाई, विचारों की कताई, सपनों की बुनाई

कारवां (तीन) कविताएं

(एक)
कुछ यात्राएं
कभी अकेले करनी होती हैं
ताकि
कुछ यात्राएं
की जा सकें
कारवां में शामिल होकर।

(दो)
आज शामिल हुई
एक जुलूस में
यादों के।
कल एक कारवां में
शामिल होना है
सपनों के।

(तीन)
गुबार बता रहा है
इधर से
गुज़रा है
एक कारवां।
हमें अपनी रफ्तार
तेज करनी होगी।
                   -कविता कृष्‍णपल्‍लवी

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